सही उत्तर अरब लीग है, जिसे औपचारिक रूप से अरब राष्ट्र संघ कहा जाता है, जिसकी स्थापना 1945 में काहिरा में हुई थी। इराक मिस्र, जॉर्डन (तत्कालीन ट्रांसजॉर्डन), लेबनान, सऊदी अरब तथा सीरिया के साथ इसके मूल छह संस्थापक सदस्यों में से एक था, और उसी वर्ष कुछ समय बाद यमन भी इसमें शामिल हो गया, जिससे यह लीग आधुनिक अरब जगत के सबसे पुराने तथा सबसे लंबे समय से चल रहे क्षेत्रीय राजनीतिक संगठनों में से एक बन गई। इसका मूल उद्देश्य अरब राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक सहयोग को मजबूत करना और साझा क्षेत्रीय चिंता के मुद्दों पर उनकी स्थिति का समन्वय करना था, और आज भी यही उद्देश्य बना हुआ है। यह 1945 की स्थापना तिथि ही यहां परखा जाने वाला मुख्य तथ्य है, क्योंकि यह अन्य सभी विकल्पों से वर्षों या दशकों पहले की है। पहला भ्रामक विकल्प ओपेक बहुत बाद में, 1960 में, तेल-निर्यातक देशों के आर्थिक कार्टेल के रूप में स्थापित हुआ; इराक वास्तव में ओपेक का भी संस्थापक सदस्य है, परंतु ओपेक एक आर्थिक संगठन है जो पेट्रोलियम नीति पर केंद्रित है, न कि प्रश्न में वर्णित 1945 का पैन-अरब राजनीतिक निकाय। दूसरा भ्रामक विकल्प खाड़ी सहयोग परिषद और भी बाद में, 1981 में स्थापित हुई, और इसकी सदस्यता केवल छह खाड़ी अरब राजतंत्रों — सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन तथा ओमान — तक सीमित है, जिसमें इराक कभी शामिल नहीं रहा क्योंकि इराक एक गणराज्य है और इस निर्धारित खाड़ी-राजतंत्र समूह से बाहर है। चौथा भ्रामक विकल्प इस्लामी सहयोग संगठन 1969 में स्थापित हुआ और यह विश्वभर के मुस्लिम-बहुल राष्ट्रों का एक कहीं अधिक व्यापक धार्मिक-राजनीतिक निकाय है, न कि विशेष रूप से अरब क्षेत्रीय संगठन, और यद्यपि इराक इसका सदस्य है, इसकी स्थापना 1945 में नहीं हुई थी।