भारत की कृषि में कौन-सा पद वर्गीकरण या पहचान “मुख्यतः पौधे के तने से प्राप्त प्राकृतिक बास्ट रेशा फसल” तथा “गर्म आर्द्र दशाएं और पर्याप्त वर्षा खेती के लिए अनुकूल हैं” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प A — जूट। जूट की सही पहचान मुख्यतः पौधे के तने से प्राप्त प्राकृतिक बास्ट रेशा फसल के रूप में होती है। जूट का संबंध गर्म आर्द्र दशाएं और पर्याप्त वर्षा खेती के लिए अनुकूल हैं से भी है। जूट की एक अन्य पहचान बाढ़ मैदानों और डेल्टाओं की नई जलोढ़ मिट्टी उपयुक्त होती है है। जूट का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य जल में रेटिंग प्रक्रिया तने से उपयोगी रेशा अलग करती है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प B — खरीफ फसलें: खरीफ फसलें सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ बोई जाने वाली फसलें है। यहां यह गलत है क्योंकि खरीफ फसलें का वास्तविक संबंध इनका मुख्य वृद्धि काल वर्षा ऋतु में होता है से है। • विकल्प C — रबी फसलें: रबी फसलें मानसून के बाद सामान्यतः बोई जाने वाली शीतकालीन फसलें है। यहां यह गलत है क्योंकि रबी फसलें का वास्तविक संबंध ये मुख्यतः ठंडे और अपेक्षाकृत शुष्क महीनों में बढ़ती हैं से है। • विकल्प D — जायद फसलें: जायद फसलें रबी और खरीफ ऋतुओं के बीच उगाई जाने वाली अल्पावधि फसलें है। यहां यह गलत है क्योंकि जायद फसलें का वास्तविक संबंध इनका मौसम मुख्यतः मानसून से पहले गर्मी के महीनों में होता है से है। परीक्षा सार: जूट को “मुख्यतः पौधे के तने से प्राप्त प्राकृतिक बास्ट रेशा फसल” और “गर्म आर्द्र दशाएं और पर्याप्त वर्षा खेती के लिए अनुकूल हैं” से जोड़कर याद रखें।