भारत के वनों में कौन-सा पद प्रवाह, बेसिन या संबंधित विशेषता “घनत्व सीमा पूरी होने पर मैंग्रोव आवरण भी इस श्रेणी में आ सकता है” तथा “इसका छत्र मध्यम सघन और खुले वन से अधिक घना होता है” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प C — अत्यधिक सघन वन। अत्यधिक सघन वन की सही पहचान घनत्व सीमा पूरी होने पर मैंग्रोव आवरण भी इस श्रेणी में आ सकता है के रूप में होती है। अत्यधिक सघन वन का संबंध इसका छत्र मध्यम सघन और खुले वन से अधिक घना होता है से भी है। अत्यधिक सघन वन की एक अन्य पहचान घनत्व सीमा पूरी होने पर मैंग्रोव आवरण भी इस श्रेणी में आ सकता है है। अत्यधिक सघन वन का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य इसका छत्र मध्यम सघन और खुले वन से अधिक घना होता है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — मध्यम सघन वन: मध्यम सघन वन छत्र घनत्व में यह अत्यधिक सघन वन और खुले वन के बीच है है। यहां यह गलत है क्योंकि मध्यम सघन वन का वास्तविक संबंध यह वर्गीकरण वृक्ष प्रजाति के बजाय क्राउन या छत्र घनत्व पर आधारित है से है। • विकल्प B — खुला वन: खुला वन इसका छत्र मध्यम सघन वन की तुलना में अधिक विरल होता है है। यहां यह गलत है क्योंकि खुला वन का वास्तविक संबंध 10 प्रतिशत से कम छत्र घनत्व वाली भूमि खुले वन में वर्गीकृत नहीं होती से है। • विकल्प D — झाड़ीदार वन भूमि: झाड़ीदार वन भूमि इसे मुख्य वन-आवरण घनत्व श्रेणियों से अलग रिपोर्ट किया जाता है है। यहां यह गलत है क्योंकि झाड़ीदार वन भूमि का वास्तविक संबंध झाड़ीदार वन भूमि को खुले वन के समान श्रेणी नहीं मानना चाहिए से है। परीक्षा सार: अत्यधिक सघन वन को “घनत्व सीमा पूरी होने पर मैंग्रोव आवरण भी इस श्रेणी में आ सकता है” और “इसका छत्र मध्यम सघन और खुले वन से अधिक घना होता है” से जोड़कर याद रखें।