भारत की मिट्टियों में कौन-सा पद प्रवाह, बेसिन या संबंधित विशेषता “रेह, ऊसर और कल्लर लवण-प्रभावित भूमि से जुड़े क्षेत्रीय नाम हैं” तथा “उपयुक्त स्थानों पर जलनिकास, निक्षालन और जिप्सम उपचार सुधार में सहायक हैं” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प C — लवणीय और क्षारीय मिट्टी। लवणीय और क्षारीय मिट्टी की सही पहचान रेह, ऊसर और कल्लर लवण-प्रभावित भूमि से जुड़े क्षेत्रीय नाम हैं के रूप में होती है। लवणीय और क्षारीय मिट्टी का संबंध उपयुक्त स्थानों पर जलनिकास, निक्षालन और जिप्सम उपचार सुधार में सहायक हैं से भी है। लवणीय और क्षारीय मिट्टी की एक अन्य पहचान रेह, ऊसर और कल्लर लवण-प्रभावित भूमि से जुड़े क्षेत्रीय नाम हैं है। लवणीय और क्षारीय मिट्टी का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य उपयुक्त स्थानों पर जलनिकास, निक्षालन और जिप्सम उपचार सुधार में सहायक हैं है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — पीटमय और दलदली मिट्टी: पीटमय और दलदली मिट्टी इसमें सामान्यतः अधिक ह्यूमस होता है और यह अम्लीय हो सकती है है। यहां यह गलत है क्योंकि पीटमय और दलदली मिट्टी का वास्तविक संबंध लंबे समय तक जलसंतृप्ति पौध पदार्थ के अपघटन को धीमा करती है से है। • विकल्प B — खादर: खादर नई गाद का पुनर्निक्षेपण इसे सामान्यतः अत्यधिक उपजाऊ बनाता है है। यहां यह गलत है क्योंकि खादर का वास्तविक संबंध पुराने जलोढ़ सोपानों की तुलना में इसमें अधिक बार बाढ़ आती है से है। • विकल्प D — बांगर: बांगर इसकी मृदा परत में कैल्शियमयुक्त कंकर ग्रंथियां मिल सकती हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि बांगर का वास्तविक संबंध खादर की तुलना में बाढ़ द्वारा इसका नवीकरण कम होता है से है। परीक्षा सार: लवणीय और क्षारीय मिट्टी को “रेह, ऊसर और कल्लर लवण-प्रभावित भूमि से जुड़े क्षेत्रीय नाम हैं” और “उपयुक्त स्थानों पर जलनिकास, निक्षालन और जिप्सम उपचार सुधार में सहायक हैं” से जोड़कर याद रखें।