यह युग्मित प्रश्न दो स्वतंत्र ऐतिहासिक संबंधों की जाँच करता है और दिए गए क्रम में दोनों उत्तर सही होना आवश्यक है। पहले कथन का सत्यापित उत्तर जातिगत पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी सामाजिक वर्चस्व है। पेरियार के आत्मसम्मान आंदोलन ने मुख्यतः समाज की किस विशेषता को चुनौती दी? का प्रमाणित उत्तर दिए गए सही विकल्प से स्थापित होता है। “पेरियार के आत्मसम्मान आंदोलन ने मुख्यतः समाज की किस विशेषता को चुनौती दी?” की भाषा में तिथि, स्थान और परिणाम का जो संयोजन है, वह जातिगत पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी सामाजिक वर्चस्व को निर्णायक बनाता है; केवल उसी काल का प्रसिद्ध नाम पर्याप्त नहीं है। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने दूसरे कथन का समर्थित उत्तर लघु संविधान है। इस प्रमाण के आधार पर लघु संविधान समर्थित विकल्प है। पहले तय करें कि प्रश्न व्यक्ति, संधि, युद्ध, नीति या संगठनात्मक निर्णय में से क्या पूछता है; फिर उसी श्रेणी में लघु संविधान की जाँच करें। तीनों distractors की जाँच करने पर स्पष्ट होता है कि भारत का मैग्ना कार्टा, अधिकारों का चार्टर और आपातकाल का संविधान में से प्रत्येक प्रश्न की कम-से-कम एक शर्त पूरी नहीं करता। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने इसलिए सही क्रमित युग्म जातिगत पदानुक्रम और ब्राह्मणवादी सामाजिक वर्चस्व और फिर लघु संविधान है। केवल एक सही घटक वाला विकल्प स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रश्न पूर्ण दो-भागीय मिलान माँगता है। यह प्रारूप समयक्रम, भूमिका और विकल्प तुलना की क्षमता मजबूत करता है।