यह युग्मित प्रश्न दो स्वतंत्र ऐतिहासिक संबंधों की जाँच करता है और दिए गए क्रम में दोनों उत्तर सही होना आवश्यक है। पहले कथन का सत्यापित उत्तर पी. इस प्रश्न में भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है। नरसिंह राव के पक्ष में उपलब्ध तथ्य उसी भूमिका की पुष्टि करता है, जबकि उसी आंदोलन से जुड़ाव मात्र पर्याप्त नहीं। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने आईं; निकटवर्ती अधिवेशनों और चरणों की भूमिकाओं को अलग समझना आवश्यक है; यही अंतर यहाँ पी. नरसिंह राव पर लागू होता है। तीनों distractors की जाँच करने पर स्पष्ट होता है कि राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी दूसरे कथन का समर्थित उत्तर भारत में यूरोपीयों का नस्लीय अहंकार और ब्रिटिश उदारवाद की सीमाएँ है। प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार सही उत्तर भारत में यूरोपीयों का नस्लीय अहंकार और ब्रिटिश उदारवाद की सीमाएँ है। उस सीमित संदर्भ में भारत में यूरोपीयों का नस्लीय अहंकार और ब्रिटिश उदारवाद की सीमाएँ अन्य प्रसिद्ध नामों से अलग पहचाना जाता है। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने आईं; निकटवर्ती अधिवेशनों और चरणों की भूमिकाओं को अलग समझना आवश्यक है; यही अंतर यहाँ इसलिए सही क्रमित युग्म पी. नरसिंह राव और फिर भारत में यूरोपीयों का नस्लीय अहंकार और ब्रिटिश उदारवाद की सीमाएँ है। केवल एक सही घटक वाला विकल्प स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रश्न पूर्ण दो-भागीय मिलान माँगता है। यह प्रारूप समयक्रम, भूमिका और विकल्प तुलना की क्षमता मजबूत करता है।