यह युग्मित प्रश्न दो स्वतंत्र ऐतिहासिक संबंधों की जाँच करता है और दिए गए क्रम में दोनों उत्तर सही होना आवश्यक है। पहले कथन का सत्यापित उत्तर स्वामी दयानंद सरस्वती है। प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार सही उत्तर स्वामी दयानंद सरस्वती है। प्रश्न एक निश्चित निर्णय, स्थान या कार्रवाई पूछता है। उस सीमित संदर्भ में स्वामी दयानंद सरस्वती अन्य प्रसिद्ध नामों से अलग पहचाना जाता है। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने आईं; निकटवर्ती अधिवेशनों और चरणों की भूमिकाओं को अलग समझना आवश्यक है; यही अंतर यहाँ स्वामी दयानंद सरस्वती पर लागू होता है। न तो स्वामी विवेकानंद और न राजा राममोहन राय दूसरे कथन का समर्थित उत्तर साबरमती आश्रम है। इस प्रमाण के आधार पर साबरमती आश्रम समर्थित विकल्प है। संशोधित प्रश्न स्रोत से अधिक व्यापक दावा नहीं करता और भागीदारी, नेतृत्व, स्थापना, अंतिम स्वीकृति तथा बाद के पुनर्गठन जैसी अलग भूमिकाओं को मिलाता नहीं है। दिए गए स्रोत को संबंधित अध्याय के साथ पढ़ना चाहिए, क्योंकि तिथि और कारण से काटकर याद किया गया तथ्य आसानी से दूसरे प्रसंग से मिल सकता है। विकल्पों की तुलना भी उसी संदर्भ में करने पर सही उत्तर अधिक विश्वसनीय ढंग से स्थापित होता है। प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार सही उत्तर साबरमती आश्रम है। “प्रसिद्ध इसलिए सही क्रमित युग्म स्वामी दयानंद सरस्वती और फिर साबरमती आश्रम है। केवल एक सही घटक वाला विकल्प स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रश्न पूर्ण दो-भागीय मिलान माँगता है। यह प्रारूप समयक्रम, भूमिका और विकल्प तुलना की क्षमता मजबूत करता है।