इसने विभाजन को स्वीकार किया और सत्ता हस्तांतरण के लिए तत्काल रूपरेखा प्रदान की। यही माउंटबेटन योजना (1947) का वास्तविक महत्व है। माउंटबेटन योजना के बारे में: इसने सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख तय की, और इसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पारित किया। माउंटबेटन योजना भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" माउंटबेटन योजना के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने विभाजन को स्वीकार किया और सत्ता हस्तांतरण के लिए तत्काल रूपरेखा प्रदान की। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" माउंटबेटन योजना के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने विभाजन को स्वीकार किया और सत्ता हस्तांतरण के लिए तत्काल रूपरेखा प्रदान की। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" माउंटबेटन योजना के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने विभाजन को स्वीकार किया और सत्ता हस्तांतरण के लिए तत्काल रूपरेखा प्रदान की। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में माउंटबेटन योजना (1947) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।