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कोशिका: जीवन की निर्माण इकाई - कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 (NCERT Exploration) संपूर्ण नोट्स

By Exambodh Team23 Jul 20265 min read88 Views

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 कोशिका – अध्याय का परिचय

कोशिका (Cell) किसी भी जीव की सबसे छोटी संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है, जो अपने स्तर पर जीवन की आवश्यक क्रियाएँ कर सकती है। इस अध्याय में हम कोशिका की खोज, सूक्ष्मदर्शी, कोशिका झिल्ली, कोशिका भित्ति, केंद्रक, कोशिकांग, कोशिका विभाजन और कोशिका सिद्धांत को सरल भाषा में समझेंगे।

यह अध्याय आगे पढ़े जाने वाले ऊतक, प्रजनन, आनुवंशिकता और शरीर की विभिन्न जीवन-प्रक्रियाओं की नींव तैयार करता है। इसलिए कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 कोशिका को ध्यान से समझना बहुत जरूरी है।

कोशिका – जीवन की आधारभूत इकाई का संपूर्ण सिद्धांत

2.1 कोशिकाओं का अध्ययन कैसे किया जाता है?

मानव आँख दो बिंदुओं को तभी अलग-अलग देख सकती है, जब उनके बीच की दूरी कम-से-कम 0.1 मिलीमीटर हो। इसे आँख की विभेदन सीमा (Limit of Resolution) कहते हैं। अधिकतर कोशिकाएँ इससे बहुत छोटी होती हैं, इसलिए उन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता पड़ती है।

सन् 1665 में रॉबर्ट हुक ने अपने बनाए सरल सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क की पतली परत देखी। उन्हें उसमें छोटे-छोटे डिब्बेनुमा कक्ष दिखाई दिए। उन्होंने इन कक्षों को “सेल” अर्थात कोशिका नाम दिया।

आज कोशिकाओं के अध्ययन के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के सूक्ष्मदर्शी उपयोग किए जाते हैं:

  • प्रकाश सूक्ष्मदर्शी: दृश्य प्रकाश और काँच के लेंस का उपयोग करता है।
  • इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी: इलेक्ट्रॉनों की किरण का उपयोग करता है और नैनोमीटर स्तर तक सूक्ष्म विवरण दिखा सकता है।

किसी वस्तु का कुल आवर्धन (Total Magnification) ज्ञात करने का सूत्र है:

कुल आवर्धन = नेत्रिका लेंस की शक्ति × अभिदृश्यक लेंस की शक्ति

प्याज की कोशिका का आकार कैसे ज्ञात करें?

सूक्ष्मदर्शी के गोल दृश्य क्षेत्र का व्यास मापिए। उसे मिलीमीटर से माइक्रोमीटर में बदलिए। अब गिनिए कि उस व्यास में कितनी प्याज की कोशिकाएँ आती हैं।

एक कोशिका का अनुमानित आकार = दृश्य क्षेत्र का व्यास ÷ कोशिकाओं की संख्या

2.2 कोशिका की संरचना

2.2.1 कोशिका झिल्ली – सभी कोशिकाओं की सामान्य विशेषता

हर कोशिका एक पतली परत से घिरी होती है, जिसे कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) या प्लाज्मा झिल्ली कहते हैं। यह कोशिका को बाहरी वातावरण से अलग पहचान देती है।

कोशिका झिल्ली चयनात्मक पारगम्य (Selectively Permeable) होती है। इसका अर्थ है कि यह केवल कुछ चुने हुए पदार्थों को कोशिका के अंदर या बाहर जाने देती है।

जब आलू का एक टुकड़ा सामान्य पानी में रखा जाता है, तो वह पानी ग्रहण करके फूल जाता है। उसी आकार का दूसरा टुकड़ा गाढ़े नमक या चीनी के घोल में रखने पर पानी खोकर सिकुड़ जाता है। चयनात्मक पारगम्य झिल्ली से पानी का अधिक जल-सांद्रता वाले क्षेत्र से कम जल-सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाना परासरण (Osmosis) कहलाता है।

किसी भी प्रकार के कणों का अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाना विसरण (Diffusion) कहलाता है।

समपरासरी, अल्पपरासरी और अतिपरासरी विलयन

  • समपरासरी विलयन (Isotonic): कोशिका के अंदर और बाहर विलेय की सांद्रता समान होती है। पानी का कोई शुद्ध आवागमन नहीं होता।
  • अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic): बाहर विलेय की सांद्रता कम होती है। पानी कोशिका के अंदर जाता है और कोशिका फूलती है।
  • अतिपरासरी विलयन (Hypertonic): बाहर विलेय की सांद्रता अधिक होती है। पानी कोशिका से बाहर जाता है और कोशिका सिकुड़ती है।

कोशिका झिल्ली की संरचना को द्रव मोजेक मॉडल (Fluid Mosaic Model) द्वारा समझाया जाता है। इसमें लिपिड की दो परतें होती हैं, जिनके बीच विभिन्न प्रकार के प्रोटीन जुड़े रहते हैं। लिपिड और प्रोटीन बगल की दिशा में गति कर सकते हैं, इसलिए झिल्ली द्रव जैसी व्यवहार करती है।

2.2.2 कोशिका भित्ति – कोशिका का बाहरी आवरण

पादप, कवक और जीवाणु कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर एक कठोर परत पाई जाती है, जिसे कोशिका भित्ति (Cell Wall) कहते हैं। पौधों की कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्यूलोज से बनी होती है।

कोशिका भित्ति:

  • कोशिका को निश्चित आकार और मजबूती देती है।
  • पौधों को सीधा खड़ा रहने में सहायता करती है।
  • पर्यावरणीय दबाव से सुरक्षा देती है।
  • पानी और घुले खनिजों को गुजरने देती है।

जब पादप कोशिका को गाढ़े घोल में रखा जाता है, तो पानी कोशिका से बाहर निकलता है। इससे कोशिका झिल्ली सिकुड़कर कोशिका भित्ति से अलग हो जाती है। इस प्रक्रिया को जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।

प्याज के छिलके की कोशिकाएँ कठोर कोशिका भित्ति के कारण नियमित और डिब्बेनुमा दिखाई देती हैं। मानव गाल की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती, इसलिए वे अनियमित आकार की दिखाई देती हैं।

2.3 कोशिका का आंतरिक भाग – एक समन्वित कार्य प्रणाली

एक सामान्य कोशिका में तीन मुख्य भाग होते हैं:

  • चयनात्मक पारगम्य प्लाज्मा झिल्ली
  • अर्ध-द्रव, जेली जैसा कोशिकाद्रव्य
  • आनुवंशिक पदार्थ रखने वाला केंद्रक

कोशिकाद्रव्य में कई छोटी विशिष्ट संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें कोशिकांग (Cell Organelles) कहते हैं। प्रत्येक कोशिकांग का अपना विशेष कार्य होता है।

प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर

प्रोकैरियोटिक कोशिका में झिल्ली से घिरा स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते। इसका आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में केंद्रकाभ (Nucleoid) नामक क्षेत्र में रहता है। जीवाणु इसका उदाहरण हैं।

यूकैरियोटिक कोशिका में स्पष्ट, झिल्ली से घिरा केंद्रक और अनेक झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं। पादप और जंतु कोशिकाएँ यूकैरियोटिक होती हैं।

2.3.1 प्रमुख कोशिकांग और उनके कार्य

केंद्रक

केंद्रक (Nucleus) कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है और आनुवंशिक पदार्थ को सुरक्षित रखता है। यह दोहरी केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है, जिसमें छोटे छिद्र होते हैं।

केंद्रक के अंदर केंद्रिका और क्रोमैटिन पाया जाता है। कोशिका विभाजन के समय क्रोमैटिन संघनित होकर गुणसूत्र (Chromosomes) बनाता है। गुणसूत्रों में DNA होता है। DNA के कार्यात्मक खंडों को जीन कहते हैं, जो वंशानुगत गुणों की जानकारी रखते हैं।

राइबोसोम

राइबोसोम अत्यंत छोटी संरचनाएँ हैं। ये कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र रूप से या अंतर्द्रव्यी जालिका पर पाए जाते हैं। राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण के वास्तविक स्थल हैं।

अंतर्द्रव्यी जालिका

अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum या ER) नलिकाओं और झिल्लियों का जाल है। यह पदार्थों के निर्माण और परिवहन में सहायता करती है।

  • खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER): इसकी सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं। यह मुख्य रूप से प्रोटीन बनाती है।
  • चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER): इसकी सतह पर राइबोसोम नहीं होते। यह लिपिड और कुछ हार्मोन बनाती है।
गॉल्जी तंत्र

गॉल्जी तंत्र चपटी थैलियों के ढेर से बना होता है। यह ER से प्राप्त प्रोटीन और लिपिड में बदलाव करता है, उन्हें छाँटता है और छोटी पुटिकाओं में पैक करके सही स्थान पर भेजता है। इसे कोशिका का पैकेजिंग और वितरण विभाग कहा जा सकता है।

लाइसोसोम

लाइसोसोम एकल झिल्ली वाली छोटी थैलियाँ हैं, जिनमें पाचक एंजाइम होते हैं। ये बेकार पदार्थों, हानिकारक कणों और पुराने या क्षतिग्रस्त कोशिकांगों को तोड़ते हैं। इसलिए इन्हें कोशिका की सफाई व्यवस्था कहा जाता है।

माइटोकॉन्ड्रिया

माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली वाला कोशिकांग है। इसकी भीतरी झिल्ली अंदर की ओर मुड़कर क्रिस्टी बनाती है, जिससे श्वसन के लिए अधिक सतह क्षेत्र मिलता है।

माइटोकॉन्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन द्वारा भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है और ATP के रूप में संचित होती है। ATP कोशिका की गतिविधियों के लिए तुरंत उपयोग होने वाली ऊर्जा है। इसलिए माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा गृह कहा जाता है।

प्लास्टिड

प्लास्टिड केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं।

  • हरितलवक (Chloroplast): इसमें क्लोरोफिल होता है और प्रकाश संश्लेषण होता है।
  • वर्णलवक (Chromoplast): इसमें लाल, पीले या नारंगी वर्णक होते हैं, जो फूलों और फलों को रंग देते हैं।
  • अवर्णीलवक (Leucoplast): यह रंगहीन होता है और स्टार्च, तेल या प्रोटीन का भंडारण करता है।
रिक्तिका

पौधों की परिपक्व कोशिका में सामान्यतः एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका (Vacuole) होती है। इसमें कोशिका रस भरा रहता है, जिसमें पानी, खनिज, शर्करा और अपशिष्ट पदार्थ हो सकते हैं।

रिक्तिका का आंतरिक दबाव कोशिका को तना हुआ रखता है। पानी की कमी होने पर यह दबाव घटता है और पौधा मुरझाने लगता है। जंतु कोशिकाओं में छोटी और अस्थायी रिक्तिकाएँ हो सकती हैं।

2.4 कोशिकाएँ कैसे बढ़ती और विभाजित होती हैं?

शरीर की मृत, पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएँ बनती रहती हैं। इसी कारण घाव भरते हैं और शरीर का विकास होता है। नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं।

2.4.1 समसूत्री विभाजन और अर्धसूत्री विभाजन

समसूत्री विभाजन (Mitosis) में एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। दोनों नई कोशिकाएँ आनुवंशिक रूप से जनक कोशिका के समान होती हैं और उनमें गुणसूत्रों की संख्या भी समान रहती है। यह शरीर की वृद्धि, ऊतक की मरम्मत और सामान्य रखरखाव के लिए होता है।

अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) प्रजनन अंगों की कोशिकाओं में होता है। इसमें जनक कोशिका दो बार विभाजित होकर चार संतति कोशिकाएँ बनाती है। प्रत्येक में जनक कोशिका की तुलना में आधे गुणसूत्र होते हैं। ये कोशिकाएँ युग्मक बनाती हैं। निषेचन के समय दो युग्मकों के मिलने से प्रजाति की सामान्य गुणसूत्र संख्या दोबारा स्थापित हो जाती है।

2.5 कोशिका सिद्धांत

सन् 1838 में मैथियास श्लाइडेन ने बताया कि सभी पौधे कोशिकाओं से बने हैं। सन् 1839 में थियोडोर श्वान ने बताया कि सभी जंतु भी कोशिकाओं से बने हैं। सन् 1855 में रुडोल्फ विरचो ने कहा कि नई कोशिकाएँ केवल पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं।

इन वैज्ञानिकों के कार्य से कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) बना, जिसके अनुसार:

  • सभी जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।
  • कोशिका जीवन की मूल संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है।
  • सभी नई कोशिकाएँ पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं।

2.5.1 क्या कोशिकाएँ हमेशा बढ़ती और विभाजित होती रहती हैं?

सामान्य कोशिकाएँ नियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं और आवश्यकता समाप्त होने पर मर जाती हैं। अधिकतर जंतु कोशिकाएँ पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क में आने पर विभाजन रोक देती हैं। इसे संपर्क अवरोध (Contact Inhibition) कहते हैं।

कैंसर कोशिकाएँ यह नियंत्रण खो देती हैं और लगातार विभाजित होकर असामान्य कोशिका-समूह या ट्यूमर बना सकती हैं। शरीर अनावश्यक या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाने के लिए क्रमादेशित कोशिका मृत्यु (Programmed Cell Death) का भी उपयोग करता है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ और वैज्ञानिक शब्द

  • विभेदन सीमा: वह न्यूनतम दूरी, जिस पर दो बिंदु अलग-अलग दिखाई देते हैं।
  • आवर्धन: सूक्ष्मदर्शी में वस्तु का वास्तविक आकार से कितनी गुना बड़ा दिखाई देना।
  • कोशिका झिल्ली: प्रत्येक कोशिका को घेरने वाली चयनात्मक पारगम्य झिल्ली।
  • परासरण: चयनात्मक पारगम्य झिल्ली से पानी का अधिक जल-सांद्रता से कम जल-सांद्रता की ओर जाना।
  • विसरण: कणों का अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर जाना।
  • जीवद्रव्य कुंचन: पानी खोने पर पादप कोशिका की झिल्ली का कोशिका भित्ति से अलग होना।
  • कोशिकाद्रव्य: कोशिका के अंदर पाया जाने वाला अर्ध-द्रव पदार्थ, जिसमें कोशिकांग स्थित होते हैं।
  • केंद्रकाभ: प्रोकैरियोटिक कोशिका का वह क्षेत्र, जहाँ आनुवंशिक पदार्थ पाया जाता है।
  • गुणसूत्र: DNA और प्रोटीन से बनी संरचना, जो आनुवंशिक जानकारी रखती है।
  • जीन: DNA का कार्यात्मक खंड, जो किसी वंशानुगत लक्षण की सूचना रखता है।
  • ATP: कोशिकीय गतिविधियों के लिए ऊर्जा संचित और उपलब्ध कराने वाला अणु।
  • समसूत्री विभाजन: एक कोशिका से दो समान संतति कोशिकाएँ बनाने वाला विभाजन।
  • अर्धसूत्री विभाजन: चार संतति कोशिकाएँ बनाने वाला विभाजन, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है।

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: प्याज की कोशिका का आकार

प्रश्न: सूक्ष्मदर्शी के दृश्य क्षेत्र का व्यास 4500 माइक्रोमीटर है। इस व्यास में प्याज की 30 कोशिकाएँ आती हैं। एक कोशिका का आकार ज्ञात कीजिए।

हल: 4500 ÷ 30 = 150 माइक्रोमीटर। अतः एक कोशिका का अनुमानित आकार 150 माइक्रोमीटर है।

उदाहरण 2: कुल आवर्धन

प्रश्न: नेत्रिका की शक्ति 10X और अभिदृश्यक लेंस की शक्ति 40X है। कुल आवर्धन कितना होगा?

हल: 10 × 40 = 400X। वस्तु अपने वास्तविक आकार से 400 गुना बड़ी दिखाई देगी।

उदाहरण 3: जीवद्रव्य कुंचन

प्रश्न: किसी पादप कोशिका की झिल्ली कोशिका भित्ति से अलग हो गई। उसे किस प्रकार के घोल में रखा गया था?

उत्तर: कोशिका को अतिपरासरी घोल में रखा गया था। परासरण से पानी बाहर निकलने के कारण जीवद्रव्य कुंचन हुआ।

उदाहरण 4: पानी में किशमिश

प्रश्न: सूखी किशमिश को सादे पानी में रखने पर क्या होता है?

उत्तर: बाहर का पानी अल्पपरासरी होता है। पानी परासरण द्वारा किशमिश की कोशिकाओं में प्रवेश करता है, जिससे किशमिश फूल जाती है।

उदाहरण 5: प्रोकैरियोटिक कोशिका

प्रश्न: किसी कोशिका में झिल्ली-बद्ध केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं हैं। कोशिका का प्रकार बताइए।

उत्तर: यह प्रोकैरियोटिक कोशिका है। जीवाणु इसका उदाहरण है।

उदाहरण 6: RER और SER

उत्तर: RER की सतह पर राइबोसोम होते हैं और यह प्रोटीन बनाती है। SER पर राइबोसोम नहीं होते और यह लिपिड तथा कुछ हार्मोन बनाती है।

उदाहरण 7: 46 गुणसूत्र वाली कोशिका में माइटोसिस

उत्तर: दो संतति कोशिकाएँ बनेंगी और प्रत्येक में 46 गुणसूत्र होंगे।

उदाहरण 8: 46 गुणसूत्र वाली कोशिका में मीओसिस

उत्तर: चार संतति कोशिकाएँ बनेंगी और प्रत्येक में 23 गुणसूत्र होंगे।

उदाहरण 9: पेशी कोशिका में अधिक माइटोकॉन्ड्रिया

उत्तर: पेशियों को संकुचन के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए। माइटोकॉन्ड्रिया ATP बनाते हैं, इसलिए पेशी कोशिकाओं में इनकी संख्या अधिक होती है।

उदाहरण 10: हरी कोशिका और जड़ की कोशिका

उत्तर: हरी कोशिका में प्रकाश संश्लेषण के लिए हरितलवक होंगे। भूमिगत जड़ की कोशिका में भोजन संग्रह के लिए सामान्यतः अवर्णीलवक होंगे।

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1. कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति में क्या अंतर है?

उत्तर: कोशिका झिल्ली चयनात्मक पारगम्य होती है, जबकि कोशिका भित्ति सामान्यतः स्वतंत्र रूप से पारगम्य होती है और मुख्यतः मजबूती प्रदान करती है।

प्रश्न 2. शुद्ध पानी में जंतु कोशिका फूलती और गाढ़े नमक के घोल में सिकुड़ती क्यों है?

उत्तर: शुद्ध पानी में पानी परासरण द्वारा कोशिका के अंदर जाता है। गाढ़े नमक के घोल में पानी कोशिका से बाहर निकलता है।

प्रश्न 3. पादप कोशिका के प्रमुख भागों के कार्य बताइए।

उत्तर: केंद्रक गतिविधियाँ नियंत्रित करता है, माइटोकॉन्ड्रिया श्वसन करता है, रिक्तिका भंडारण और दृढ़ता देती है, कोशिका झिल्ली सामग्री को अलग रखती है, कोशिका भित्ति मजबूती देती है, गॉल्जी तंत्र पदार्थों की पैकिंग करता है और हरितलवक भोजन बनाता है।

प्रश्न 4. पादप कोशिका में उपस्थित परंतु जंतु कोशिका में अनुपस्थित संरचनाएँ कौन-सी हैं?

उत्तर: अवर्णीलवक और कोशिका भित्ति पादप कोशिका में पाए जाते हैं, लेकिन जंतु कोशिका में नहीं।

प्रश्न 5. क्या पौधों की जड़ों में प्लास्टिड पाए जाते हैं?

उत्तर: हाँ। जड़ों में हरितलवक के स्थान पर सामान्यतः भोजन संग्रह करने वाले रंगहीन अवर्णीलवक पाए जाते हैं।

प्रश्न 6. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक की समानताएँ तथा अंतर बताइए।

उत्तर: दोनों दोहरी झिल्ली वाले कोशिकांग हैं और दोनों में अपना DNA तथा राइबोसोम होता है। माइटोकॉन्ड्रिया श्वसन द्वारा ATP बनाता है, जबकि हरितलवक प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है।

प्रश्न 7. किन कोशिकांगों में DNA पाया जाता है?

सही उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया और केंद्रक। हरितलवक में भी अपना DNA होता है।

प्रश्न 8. सादे पानी और गाढ़े नमक के घोल में रखी गाजर में क्या अंतर होगा?

उत्तर: सादे पानी में गाजर की कोशिकाएँ पानी ग्रहण करके स्फीत रहेंगी, इसलिए गाजर कठोर और कुरकुरी होगी। गाढ़े नमक के घोल में पानी बाहर निकलेगा, इसलिए गाजर नरम और लचीली हो जाएगी।

प्रश्न 9. जीवाणु और जंतु कोशिका में प्रमुख संरचनाओं की उपस्थिति बताइए।

उत्तर: दोनों में गुणसूत्र होते हैं। जीवाणु में स्पष्ट केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया और गॉल्जी तंत्र नहीं होते; जंतु कोशिका में ये पाए जाते हैं। वर्णलवक दोनों में अनुपस्थित हैं।

प्रश्न 10. आलू के कप वाले प्रयोग में चीनी या नमक के साथ पानी क्यों इकट्ठा होता है?

उत्तर: चीनी या नमक अंदर गाढ़ा घोल बनाते हैं। जीवित आलू की कोशिकाओं से पानी परासरण द्वारा अंदर आता है। खाली कप नियंत्रण का काम करता है। उबले आलू में कोशिका झिल्ली नष्ट होने के कारण सामान्य परासरण नहीं होता।

प्रश्न 11. SER का गलत बताया जाने वाला कार्य कौन-सा है?

उत्तर: SER लिपिड बनाती है, लेकिन सेल्यूलोज का संश्लेषण इसका कार्य नहीं है।

प्रश्न 12. माइटोकॉन्ड्रिया निकालने पर क्या होगा?

उत्तर: पर्याप्त ATP नहीं बनेगा। ऊर्जा की कमी के कारण कोशिका अपनी सामान्य क्रियाएँ नहीं कर पाएगी और अंततः मर सकती है।

प्रश्न 13. ट्यूमर बनने से कौन-सी प्रक्रिया रोकती है?

उत्तर: सामान्य कोशिकाओं में संपर्क अवरोध अनियंत्रित विभाजन रोकता है। पौधों में संक्रमण या आनुवंशिक बदलाव के कारण असामान्य गांठें बन सकती हैं।

प्रश्न 14. कोशिका झिल्ली के प्रोटीन और लिपिड कहाँ बनते हैं?

उत्तर: प्रोटीन RER के राइबोसोम पर और लिपिड SER में बनते हैं। ये ER से पुटिकाओं द्वारा गॉल्जी तंत्र तक जाते हैं, जहाँ संशोधित और पैक होकर कोशिका झिल्ली तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 15. यदि युग्मक माइटोसिस से बनें तो क्या होगा?

उत्तर: युग्मकों में आधी के बजाय पूरी गुणसूत्र संख्या होगी। निषेचन पर संतति में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी हो जाएगी और हर पीढ़ी में बढ़ती जाएगी।

प्रश्न 16. नमक और चीनी भोजन को खराब होने से कैसे बचाते हैं?

उत्तर: अधिक नमक या चीनी सूक्ष्मजीवों के बाहर अतिपरासरी वातावरण बनाते हैं। परासरण से उनका पानी बाहर निकलता है, जिससे वे निर्जलित होकर वृद्धि नहीं कर पाते। इसी सिद्धांत का उपयोग अचार, मुरब्बा और शरबत बनाने में किया जाता है।

अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. कोशिका को सबसे पहले किसने देखा और नाम दिया?

  • (A) रॉबर्ट ब्राउन
  • (B) रॉबर्ट हुक
  • (C) रुडोल्फ विरचो
  • (D) थियोडोर श्वान

सही उत्तर: (B) रॉबर्ट हुक

प्रश्न 2. कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहते हैं?

  • (A) गॉल्जी तंत्र
  • (B) राइबोसोम
  • (C) माइटोकॉन्ड्रिया
  • (D) लाइसोसोम

सही उत्तर: (C) माइटोकॉन्ड्रिया

प्रश्न 3. हरितलवक में पाया जाने वाला हरा वर्णक है:

  • (A) क्रोमोप्लास्ट
  • (B) क्लोरोफिल
  • (C) सेल्यूलोज
  • (D) क्रोमैटिन

सही उत्तर: (B) क्लोरोफिल

प्रश्न 4. निम्न में से कौन कोशिका भित्ति का कार्य नहीं है?

  • (A) मजबूती देना
  • (B) चयनात्मक पारगम्यता
  • (C) सुरक्षा देना
  • (D) आकार बनाए रखना

सही उत्तर: (B) चयनात्मक पारगम्यता

प्रश्न 5. अर्धसूत्री विभाजन कहाँ होता है?

  • (A) त्वचा की कोशिकाओं में
  • (B) रक्त कोशिकाओं में
  • (C) प्रजनन कोशिकाओं में
  • (D) पेशी कोशिकाओं में

सही उत्तर: (C) प्रजनन कोशिकाओं में

प्रश्न 6. कोशिका सिद्धांत से जुड़े वैज्ञानिक कौन थे?

उत्तर: श्लाइडेन ने पौधों, श्वान ने जंतुओं और विरचो ने पहले से मौजूद कोशिकाओं से नई कोशिका बनने का विचार दिया।

प्रश्न 7. लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहा जाता है?

उत्तर: इसकी झिल्ली फटने पर पाचक एंजाइम कोशिका के अपने भागों को भी पचा सकते हैं।

प्रश्न 8. पादप और जंतु कोशिका में दो अंतर बताइए।

उत्तर: पादप कोशिका में कोशिका भित्ति और प्लास्टिड होते हैं, जबकि जंतु कोशिका में नहीं। पादप कोशिका में बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है, जबकि जंतु कोशिका में छोटी रिक्तिकाएँ हो सकती हैं।

प्रश्न 9. केंद्रिका का क्या महत्व है?

उत्तर: केंद्रिका में राइबोसोम के उपखंडों का निर्माण और संयोजन होता है।

प्रश्न 10. माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना और कार्य बताइए।

उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली वाला कोशिकांग है। इसकी भीतरी झिल्ली क्रिस्टी बनाती है। यहाँ कोशिकीय श्वसन और ATP निर्माण होता है।

प्रश्न 11. आलू के प्रयोग से परासरण समझाइए।

उत्तर: सादे पानी में पानी आलू की कोशिकाओं में प्रवेश करता है, जबकि गाढ़े नमक या चीनी के घोल में पानी कोशिकाओं से बाहर निकलता है।

प्रश्न 12. डिब्बेनुमा कोशिका पादप कोशिका क्यों हो सकती है?

उत्तर: कठोर कोशिका भित्ति पादप कोशिका को नियमित, डिब्बेनुमा आकार देती है। जंतु कोशिका केवल लचीली झिल्ली के कारण अनियमित हो सकती है।

प्रश्न 13. राइबोसोम काम करना बंद कर दें तो क्या होगा?

उत्तर: प्रोटीन निर्माण रुक जाएगा, जिससे एंजाइम, मरम्मत और अन्य जीवन-प्रक्रियाएँ प्रभावित होंगी।

प्रश्न 14. पादप कोशिका में बड़ी रिक्तिका का क्या लाभ है?

उत्तर: यह पानी और पदार्थों का भंडारण करती है तथा स्फीति दबाव से कोशिका को कठोर रखती है।

प्रश्न 15. पड़ोसी कोशिकाओं के संपर्क के बाद भी लगातार विभाजन किस स्थिति का संकेत है?

उत्तर: यह कैंसर या ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इसमें संपर्क अवरोध की सामान्य प्रक्रिया विफल हो जाती है।

त्वरित पुनरावृत्ति और अध्याय सारांश

  • कोशिका जीवों की मूल संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है।
  • रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क में कोशिकाएँ देखीं।
  • कोशिका झिल्ली चयनात्मक पारगम्य होती है।
  • परासरण केवल पानी की गति से संबंधित है; विसरण किसी भी कण की गति हो सकता है।
  • पादप कोशिका की कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्यूलोज से बनी होती है।
  • प्रोकैरियोटिक कोशिका में झिल्ली-बद्ध केंद्रक और कोशिकांग नहीं होते।
  • केंद्रक नियंत्रण करता है, राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं और माइटोकॉन्ड्रिया ATP बनाता है।
  • हरितलवक प्रकाश संश्लेषण, वर्णलवक रंग और अवर्णीलवक भंडारण से संबंधित है।
  • माइटोसिस से दो समान कोशिकाएँ और मीओसिस से चार आधे गुणसूत्र वाली कोशिकाएँ बनती हैं।
  • संपर्क अवरोध सामान्य कोशिका विभाजन को नियंत्रित करता है।

विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ

  • परासरण और विसरण को एक समझना: परासरण में केवल पानी चयनात्मक झिल्ली से गुजरता है।
  • कोशिका भित्ति को चयनात्मक पारगम्य मानना: चयनात्मक नियंत्रण कोशिका झिल्ली करती है।
  • RER और SER को मिलाना: RER पर राइबोसोम होते हैं; SER पर नहीं।
  • सभी पादप कोशिकाओं में हरितलवक मानना: जड़ जैसी भूमिगत कोशिकाओं में सामान्यतः अवर्णीलवक होते हैं।
  • माइटोसिस और मीओसिस को मिलाना: माइटोसिस वृद्धि और मरम्मत के लिए, जबकि मीओसिस युग्मक निर्माण के लिए होता है।
  • जीवाणु में DNA न मानना: जीवाणु में DNA होता है, लेकिन वह केंद्रक झिल्ली से घिरा नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ATP का पूरा नाम और महत्व क्या है?

उत्तर: ATP का पूरा नाम एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट है। यह कोशिका की गतिविधियों के लिए ऊर्जा संचित और उपलब्ध कराता है।

कोशिका को जीवन की मूल इकाई क्यों कहते हैं?

उत्तर: कोशिका सबसे छोटी संरचना है, जो आवश्यक जीवन-प्रक्रियाएँ कर सकती है। सभी जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।

प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: यूकैरियोटिक कोशिका में स्पष्ट झिल्ली-बद्ध केंद्रक और कोशिकांग होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक कोशिका में ये अनुपस्थित होते हैं।

पौधों को बड़ी केंद्रीय रिक्तिका की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: यह पानी, खनिज, शर्करा और अपशिष्ट पदार्थों का भंडारण करती है तथा स्फीति दबाव बनाकर पौधे को दृढ़ रखती है।

अनियंत्रित माइटोसिस का क्या परिणाम हो सकता है?

उत्तर: अनियंत्रित कोशिका विभाजन से असामान्य कोशिका-समूह या ट्यूमर बन सकता है, जो कैंसर से संबंधित हो सकता है।

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर: यह अध्याय ऊतक, प्रजनन, आनुवंशिकी और अन्य उच्च कक्षाओं के जीव विज्ञान विषयों को समझने की आधारशिला है।

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