भारत की जलवायु में कौन-सा पद महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य “लंबे समय तक संपर्क से ताप रोग और निर्जलीकरण हो सकता है” तथा “मानसून-पूर्व ग्रीष्म की अत्यधिक गर्म और शुष्क स्थानीय पवन” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प D — लू। लू की सही पहचान लंबे समय तक संपर्क से ताप रोग और निर्जलीकरण हो सकता है के रूप में होती है। लू का संबंध मानसून-पूर्व ग्रीष्म की अत्यधिक गर्म और शुष्क स्थानीय पवन से भी है। लू की एक अन्य पहचान यह विशेष रूप से गर्म दोपहर की परिस्थितियों से जुड़ी है है। लू का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य लंबे समय तक संपर्क से ताप रोग और निर्जलीकरण हो सकता है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — आम्र वर्षा: आम्र वर्षा ये मानसून-पूर्व बागानी फसल परिस्थितियों में भी सहायक हो सकती हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि आम्र वर्षा का वास्तविक संबंध दक्षिण भारत की मानसून-पूर्व संवहनीय वर्षा से है। • विकल्प B — काल बैसाखी: काल बैसाखी ये तूफान कुछ फसलों को लाभ देने के साथ स्थानीय क्षति भी कर सकते हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि काल बैसाखी का वास्तविक संबंध नॉरवेस्टर कहलाने वाला तीव्र मानसून-पूर्व आंधी-तूफान से है। • विकल्प C — एल नीनो: एल नीनो भारतीय वर्षा पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण है पर प्रत्येक घटना में समान नहीं होता है। यहां यह गलत है क्योंकि एल नीनो का वास्तविक संबंध एल नीनो-दक्षिणी दोलन का उष्ण चरण से है। परीक्षा सार: लू को “लंबे समय तक संपर्क से ताप रोग और निर्जलीकरण हो सकता है” और “मानसून-पूर्व ग्रीष्म की अत्यधिक गर्म और शुष्क स्थानीय पवन” से जोड़कर याद रखें।