भारत के खनिज संसाधनों में कौन-सा पद वर्गीकरण या पहचान “अवसादी बेसिनों में संचित तरल जीवाश्म ईंधन” तथा “भारत के महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में असम, गुजरात, मुंबई अपतटीय और कृष्णा-गोदावरी बेसिन शामिल हैं” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प A — पेट्रोलियम। पेट्रोलियम की सही पहचान अवसादी बेसिनों में संचित तरल जीवाश्म ईंधन के रूप में होती है। पेट्रोलियम का संबंध भारत के महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में असम, गुजरात, मुंबई अपतटीय और कृष्णा-गोदावरी बेसिन शामिल हैं से भी है। पेट्रोलियम की एक अन्य पहचान कच्चे तेल को रिफाइनरियों में ईंधन और पेट्रोकेमिकल कच्चे माल में बदला जाता है है। पेट्रोलियम का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य अपनति, भ्रंश और छिद्रयुक्त जलाशय चट्टानें हाइड्रोकार्बन जाल बना सकती हैं है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प B — प्राकृतिक गैस: प्राकृतिक गैस मुख्यतः मीथेन से बना गैसीय जीवाश्म ईंधन है। यहां यह गलत है क्योंकि प्राकृतिक गैस का वास्तविक संबंध यह कई स्थलस्थित और अपतटीय अवसादी बेसिनों में पाया जाता है से है। • विकल्प C — लौह अयस्क: लौह अयस्क मुख्यतः लोहा और इस्पात बनाने में प्रयुक्त धात्विक खनिज संसाधन है। यहां यह गलत है क्योंकि लौह अयस्क का वास्तविक संबंध हेमेटाइट और मैग्नेटाइट इसके प्रमुख अयस्क खनिज हैं से है। • विकल्प D — मैंगनीज अयस्क: मैंगनीज अयस्क इस्पात और मिश्रधातु निर्माण में महत्वपूर्ण धात्विक खनिज है। यहां यह गलत है क्योंकि मैंगनीज अयस्क का वास्तविक संबंध प्रमुख भंडार ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के भागों से जुड़े हैं से है। परीक्षा सार: पेट्रोलियम को “अवसादी बेसिनों में संचित तरल जीवाश्म ईंधन” और “भारत के महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में असम, गुजरात, मुंबई अपतटीय और कृष्णा-गोदावरी बेसिन शामिल हैं” से जोड़कर याद रखें।