भारत के खनिज संसाधनों में कौन-सा पद महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य “धातुकर्म उपयोग से पहले लाभकारीकरण अयस्क की गुणवत्ता सुधार सकता है” तथा “मुख्यतः लोहा और इस्पात बनाने में प्रयुक्त धात्विक खनिज संसाधन” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प D — लौह अयस्क। लौह अयस्क की सही पहचान धातुकर्म उपयोग से पहले लाभकारीकरण अयस्क की गुणवत्ता सुधार सकता है के रूप में होती है। लौह अयस्क का संबंध मुख्यतः लोहा और इस्पात बनाने में प्रयुक्त धात्विक खनिज संसाधन से भी है। लौह अयस्क की एक अन्य पहचान महत्वपूर्ण पट्टियां ओडिशा-झारखंड, दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर और कर्नाटक-गोवा क्षेत्रों में हैं है। लौह अयस्क का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य धातुकर्म उपयोग से पहले लाभकारीकरण अयस्क की गुणवत्ता सुधार सकता है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — मैंगनीज अयस्क: मैंगनीज अयस्क इसका उपयोग बैटरियों और कुछ रासायनिक उद्योगों में भी होता है है। यहां यह गलत है क्योंकि मैंगनीज अयस्क का वास्तविक संबंध इस्पात और मिश्रधातु निर्माण में महत्वपूर्ण धात्विक खनिज से है। • विकल्प B — बॉक्साइट: बॉक्साइट विद्युत अपघटनी एल्युमिनियम गलन से पहले बॉक्साइट से एल्युमिना निकाला जाता है है। यहां यह गलत है क्योंकि बॉक्साइट का वास्तविक संबंध एल्युमिनियम उत्पादन में प्रयुक्त प्रमुख अयस्क से है। • विकल्प C — अभ्रक: अभ्रक मस्कोवाइट और फ्लोगोपाइट अभ्रक की महत्वपूर्ण किस्में हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि अभ्रक का वास्तविक संबंध पतली लचीली परतों में विभाजित होने वाला शीट-सिलिकेट खनिज समूह से है। परीक्षा सार: लौह अयस्क को “धातुकर्म उपयोग से पहले लाभकारीकरण अयस्क की गुणवत्ता सुधार सकता है” और “मुख्यतः लोहा और इस्पात बनाने में प्रयुक्त धात्विक खनिज संसाधन” से जोड़कर याद रखें।