भारत के खनिज संसाधनों में कौन-सा पद वर्गीकरण या पहचान “पतली लचीली परतों में विभाजित होने वाला शीट-सिलिकेट खनिज समूह” तथा “पारंपरिक अभ्रक पट्टियां झारखंड, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से जुड़ी हैं” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प A — अभ्रक। अभ्रक की सही पहचान पतली लचीली परतों में विभाजित होने वाला शीट-सिलिकेट खनिज समूह के रूप में होती है। अभ्रक का संबंध पारंपरिक अभ्रक पट्टियां झारखंड, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से जुड़ी हैं से भी है। अभ्रक की एक अन्य पहचान इसके विद्युत और तापीय रोधक गुण औद्योगिक उपयोग में सहायक हैं है। अभ्रक का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य मस्कोवाइट और फ्लोगोपाइट अभ्रक की महत्वपूर्ण किस्में हैं है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प B — तांबा अयस्क: तांबा अयस्क विद्युत चालकता और तन्यता के लिए मूल्यवान धात्विक संसाधन है। यहां यह गलत है क्योंकि तांबा अयस्क का वास्तविक संबंध राजस्थान का खेतड़ी, मध्य प्रदेश का मलांजखंड और झारखंड का सिंहभूम महत्वपूर्ण संबंध हैं से है। • विकल्प C — चूना पत्थर: चूना पत्थर मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट खनिजों से बनी अवसादी चट्टान है। यहां यह गलत है क्योंकि चूना पत्थर का वास्तविक संबंध राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बड़े भंडार हैं से है। • विकल्प D — यूरेनियम: यूरेनियम परमाणु ईंधन के रूप में प्रयुक्त रेडियोधर्मी खनिज संसाधन है। यहां यह गलत है क्योंकि यूरेनियम का वास्तविक संबंध झारखंड में जादूगोड़ा और निकटवर्ती सिंहभूम भंडार महत्वपूर्ण संबंध हैं से है। परीक्षा सार: अभ्रक को “पतली लचीली परतों में विभाजित होने वाला शीट-सिलिकेट खनिज समूह” और “पारंपरिक अभ्रक पट्टियां झारखंड, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से जुड़ी हैं” से जोड़कर याद रखें।