भारत की मिट्टियों में कौन-सा पद महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य “अधिक नमी धारण क्षमता इसे कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है” तथा “रेगुर या काली कपास मिट्टी कहलाने वाली चिकनी मिट्टी से भरपूर मृदा” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प D — काली मिट्टी। काली मिट्टी की सही पहचान अधिक नमी धारण क्षमता इसे कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है के रूप में होती है। काली मिट्टी का संबंध रेगुर या काली कपास मिट्टी कहलाने वाली चिकनी मिट्टी से भरपूर मृदा से भी है। काली मिट्टी की एक अन्य पहचान शुष्क ऋतु में इसमें गहरी दरारें विकसित होती हैं है। काली मिट्टी का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य अधिक नमी धारण क्षमता इसे कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — लाल और पीली मिट्टी: लाल और पीली मिट्टी इसमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है है। यहां यह गलत है क्योंकि लाल और पीली मिट्टी का वास्तविक संबंध मुख्यतः लौह यौगिकों से रंग प्राप्त करने वाली मिट्टी से है। • विकल्प B — लैटेराइट मिट्टी: लैटेराइट मिट्टी खाद देने पर इसमें चाय, कॉफी, रबर और काजू उगाए जा सकते हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि लैटेराइट मिट्टी का वास्तविक संबंध उच्च तापमान और अधिक वर्षा में तीव्र निक्षालन से बनी मिट्टी से है। • विकल्प C — शुष्क मिट्टी: शुष्क मिट्टी सिंचाई उपयुक्त क्षेत्रों को उत्पादक बना सकती है, पर खराब प्रबंधन से लवणता बढ़ सकती है है। यहां यह गलत है क्योंकि शुष्क मिट्टी का वास्तविक संबंध शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों की रेतीली मिट्टी से है। परीक्षा सार: काली मिट्टी को “अधिक नमी धारण क्षमता इसे कपास के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है” और “रेगुर या काली कपास मिट्टी कहलाने वाली चिकनी मिट्टी से भरपूर मृदा” से जोड़कर याद रखें।