भारत की मिट्टियों में कौन-सा पद वर्गीकरण या पहचान “मुख्यतः लौह यौगिकों से रंग प्राप्त करने वाली मिट्टी” तथा “पूर्वी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के भागों में व्यापक” से सही रूप से संबंधित है?
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सही उत्तर: विकल्प A — लाल और पीली मिट्टी। लाल और पीली मिट्टी की सही पहचान मुख्यतः लौह यौगिकों से रंग प्राप्त करने वाली मिट्टी के रूप में होती है। लाल और पीली मिट्टी का संबंध पूर्वी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के भागों में व्यापक से भी है। लाल और पीली मिट्टी की एक अन्य पहचान यह मुख्यतः प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों के अपक्षय से बनती है है। लाल और पीली मिट्टी का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य इसमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प B — लैटेराइट मिट्टी: लैटेराइट मिट्टी उच्च तापमान और अधिक वर्षा में तीव्र निक्षालन से बनी मिट्टी है। यहां यह गलत है क्योंकि लैटेराइट मिट्टी का वास्तविक संबंध पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और पूर्वोत्तर पहाड़ियों के कुछ भागों में पाई जाती है से है। • विकल्प C — शुष्क मिट्टी: शुष्क मिट्टी शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों की रेतीली मिट्टी है। यहां यह गलत है क्योंकि शुष्क मिट्टी का वास्तविक संबंध पश्चिमी राजस्थान और निकटवर्ती शुष्क क्षेत्रों में प्रमुख से है। • विकल्प D — वन और पर्वतीय मिट्टी: वन और पर्वतीय मिट्टी पर्वतीय वनस्पति और स्थलाकृति के अंतर्गत बनी विविध मिट्टी है। यहां यह गलत है क्योंकि वन और पर्वतीय मिट्टी का वास्तविक संबंध हिमालय और अन्य उच्चभूमि क्षेत्रों में पाई जाती है से है। परीक्षा सार: लाल और पीली मिट्टी को “मुख्यतः लौह यौगिकों से रंग प्राप्त करने वाली मिट्टी” और “पूर्वी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के भागों में व्यापक” से जोड़कर याद रखें।