बराबर पहाड़ियों की गुफाओं के अभिलेखों में सम्राट अशोक द्वारा आजीवक तपस्वियों को गुफाएँ समर्पित करने का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। अशोक के पौत्र दशरथ मौर्य ने निकटवर्ती नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएँ भी आजीवकों को दान दी थीं। बौद्ध धर्म वाला विकल्प गलत है, क्योंकि अशोक बौद्ध धर्म का समर्थक अवश्य था, पर इन विशेष गुफाओं के दान-अभिलेख आजीवकों का नाम लेते हैं। जैन धर्म भी गलत है; मौर्य इतिहास में जैन परंपराओं का महत्व है, किंतु इन गुफाओं का समर्पण जैन साधुओं को नहीं हुआ था। ब्राह्मण धर्म वाला विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि ये गुफाएँ ब्राह्मणical पूजा-स्थल के रूप में समर्पित नहीं की गई थीं। यह प्रश्न सिखाता है कि अशोक से संबंधित प्रत्येक स्मारक को स्वतः बौद्ध नहीं मानना चाहिए; सही निष्कर्ष समकालीन अभिलेख से निकालना चाहिए।