यह युग्मित प्रश्न दो स्वतंत्र ऐतिहासिक संबंधों की जाँच करता है और दिए गए क्रम में दोनों उत्तर सही होना आवश्यक है। पहले कथन का सत्यापित उत्तर केशवचंद्र सेन है। केशवचंद्र सेन के पक्ष में उपलब्ध तथ्य उसी भूमिका की पुष्टि करता है, जबकि उसी आंदोलन से जुड़ाव मात्र पर्याप्त नहीं। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने आईं; निकटवर्ती अधिवेशनों और चरणों की भूमिकाओं को अलग समझना आवश्यक है; यही अंतर यहाँ केशवचंद्र सेन पर लागू होता है। तीनों distractors की जाँच करने पर स्पष्ट होता है कि स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती और गोपाल हरि देशमुख में से प्रत्येक प्रश्न की कम-से-कम एक शर्त दूसरे कथन का समर्थित उत्तर लॉर्ड वेवेल है। प्रश्न में दिए गए संदर्भ के अनुसार सही उत्तर लॉर्ड वेवेल है। उस सीमित संदर्भ में लॉर्ड वेवेल अन्य प्रसिद्ध नामों से अलग पहचाना जाता है। यह विकास राष्ट्रीय आंदोलन के उस व्यापक क्रम का हिस्सा था जिसमें संवैधानिक वार्ता, बहिष्कार, जन-आंदोलन, सविनय अवज्ञा और क्रांतिकारी गतिविधियाँ अलग-अलग रणनीतियों के रूप में सामने आईं; निकटवर्ती अधिवेशनों और चरणों की भूमिकाओं को अलग समझना आवश्यक है; यही अंतर यहाँ लॉर्ड वेवेल पर लागू होता है। न तो लॉर्ड लिनलिथगो और न लॉर्ड चेम्सफोर्ड अपेक्षित प्रमाण से मेल इसलिए सही क्रमित युग्म केशवचंद्र सेन और फिर लॉर्ड वेवेल है। केवल एक सही घटक वाला विकल्प स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रश्न पूर्ण दो-भागीय मिलान माँगता है। यह प्रारूप समयक्रम, भूमिका और विकल्प तुलना की क्षमता मजबूत करता है।