इसने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस और एक संवैधानिक ढांचे का प्रस्ताव रखा। यही नेहरू रिपोर्ट (1928) का वास्तविक महत्व है। नेहरू रिपोर्ट के बारे में: यह भारतीयों द्वारा स्वयं तैयार किया गया पहला संविधान मसौदा था, जिसकी अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू ने की थी, और इसमें पूर्ण स्वतंत्रता के बजाय डोमिनियन स्टेटस का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेताओं ने विरोध किया। नेहरू रिपोर्ट भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" नेहरू रिपोर्ट के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस और एक संवैधानिक ढांचे का प्रस्ताव रखा। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" नेहरू रिपोर्ट के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस और एक संवैधानिक ढांचे का प्रस्ताव रखा। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" नेहरू रिपोर्ट के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस और एक संवैधानिक ढांचे का प्रस्ताव रखा।