जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) से सबसे अधिक जुड़े थे, क्योंकि इसमें पूर्ण स्वराज को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में अपनाया गया। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन के बारे में: जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया, और 26 जनवरी को उस दिन के रूप में तय किया गया जब देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ता हर वर्ष स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा लेंगे। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। महात्मा गांधी और लॉर्ड इरविन गलत है क्योंकि महात्मा गांधी और लॉर्ड इरविन गांधी-इरविन समझौता (1931) से जुड़े हैं, कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन से नहीं। ब्रिटिश संसद गलत है क्योंकि ब्रिटिश संसद भारत शासन अधिनियम (1935) से जुड़े हैं, कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन से नहीं। विनोबा भावे गलत है क्योंकि विनोबा भावे व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) से जुड़े हैं, कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन से नहीं। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को इससे ठीक पहले और बाद की घटनाओं को भी 1927-1947 की समयरेखा में दोहराना चाहिए, क्योंकि प्रश्न बनाने वाले प्रायः निकटवर्ती वर्षों और जुड़े व्यक्तित्वों का उपयोग विकल्पों में करते हैं। याद रखें: कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन — 1929 — जवाहरलाल नेहरू।