इसमें पूर्ण स्वराज को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में अपनाया गया। यही कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) का वास्तविक महत्व है। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन के बारे में: जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया, और 26 जनवरी को उस दिन के रूप में तय किया गया जब देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ता हर वर्ष स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा लेंगे। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें पूर्ण स्वराज को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में अपनाया गया। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें पूर्ण स्वराज को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में अपनाया गया। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें पूर्ण स्वराज को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में अपनाया गया। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।