इसमें युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस की पेशकश की गई, लेकिन यह भारतीय राजनीतिक मांगों को संतुष्ट करने में विफल रहा। यही क्रिप्स मिशन (1942) का वास्तविक महत्व है। क्रिप्स मिशन के बारे में: सर स्टैफर्ड क्रिप्स द्वितीय विश्व युद्ध के गहरे संकट के दौरान यह प्रस्ताव लेकर आए, लेकिन कांग्रेस ने इसे अस्वीकार कर दिया और इसे 'डूबते हुए बैंक का पोस्ट-डेटेड चेक' बताया। क्रिप्स मिशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" क्रिप्स मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस की पेशकश की गई, लेकिन यह भारतीय राजनीतिक मांगों को संतुष्ट करने में विफल रहा। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" क्रिप्स मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस की पेशकश की गई, लेकिन यह भारतीय राजनीतिक मांगों को संतुष्ट करने में विफल रहा। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" क्रिप्स मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस की पेशकश की गई, लेकिन यह भारतीय राजनीतिक मांगों को संतुष्ट करने में विफल रहा।