वेवेल योजना सही रूप से 1945 वर्ष से जुड़ा है, क्योंकि इसमें वायसराय की कार्यकारी परिषद के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन शिमला सम्मेलन विफल रहा। वेवेल योजना के बारे में: इस योजना के तहत भारतीय राजनीतिक नेताओं का शिमला सम्मेलन बुलाया गया, जो मुख्यतः मुस्लिम लीग की उस मांग पर विफल हो गया कि कार्यकारी परिषद के सभी मुस्लिम सदस्यों को नामित करने का अधिकार केवल उसी के पास हो। वेवेल योजना भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन गलत है क्योंकि कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन 1929 में हुआ था, 1945 में नहीं, इसलिए यह वेवेल योजना से जुड़े इस प्रश्न में फिट नहीं बैठता। गांधी-इरविन समझौता गलत है क्योंकि गांधी-इरविन समझौता 1931 में हुआ था, 1945 में नहीं, इसलिए यह वेवेल योजना से जुड़े इस प्रश्न में फिट नहीं बैठता। माउंटबेटन योजना गलत है क्योंकि माउंटबेटन योजना 1947 में हुआ था, 1945 में नहीं, इसलिए यह वेवेल योजना से जुड़े इस प्रश्न में फिट नहीं बैठता। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में वेवेल योजना (1945) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता। वेवेल योजना की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को इससे ठीक पहले और बाद की घटनाओं को भी 1927-1947 की समयरेखा में दोहराना चाहिए, क्योंकि प्रश्न बनाने वाले प्रायः निकटवर्ती वर्षों और जुड़े व्यक्तित्वों का उपयोग विकल्पों में करते हैं। याद रखें: वेवेल योजना — 1945 — लॉर्ड वेवेल।