स्याद्वाद (अनेकांतवाद) को किस सिद्धांत के रूप में जाना जाता है?
Last Updated:
यह प्रश्न जैन धर्म के इतिहास, सिद्धांत, तीर्थंकर-परंपरा अथवा महावीर के जीवन से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण तथ्य को स्पष्ट करता है। सही उत्तर ज्ञान की सापेक्षता और सशर्त कथन है। स्याद्वाद कथनों की सशर्त प्रकृति—‘किसी दृष्टि से’—बताता है और अनेकांतवाद से जुड़ा है, जिसके अनुसार वास्तविकता के अनेक पक्ष हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि सत्य मनमाना है, बल्कि सामान्य एकल कथन सीमित दृष्टिकोण को व्यक्त करता है। प्रश्न में दिए गए निकट विकल्प प्रायः किसी दूसरे धर्म, बाद के जैन आचार्य या भिन्न घटना से संबंधित होते हैं।