जैन धर्म के विषय में कौन-सा कथन सही है?
व्याख्या
सही उत्तर: वेदों की प्रामाणिकता का निषेध और कठोर अहिंसा। जैन धर्म वेदों की प्रामाणिकता और सृष्टिकर्ता ईश्वर को स्वीकार नहीं करता तथा अहिंसा पर अत्यधिक बल देता है। महावीर चौबीसवें तीर्थंकर थे; उन्होंने किसी बिल्कुल नए धर्म की स्थापना के बजाय पुरानी श्रमण परंपरा को पुनर्गठित और व्यापक किया। इसलिए बाकी विकल्प प्रश्न में पूछे गए विशिष्ट जैन सिद्धांत, व्यक्ति, स्थान, उपाधि या काल-संदर्भ से मेल नहीं खाते।