इसने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। यही दांडी मार्च (1930) का वास्तविक महत्व है। दांडी मार्च के बारे में: गांधी ने साबरमती आश्रम से तटीय गांव दांडी तक चौबीस दिनों में लगभग 385 किलोमीटर की यात्रा की, और इस मार्च ने देशभर में व्यापक सविनय अवज्ञा आंदोलन को सीधे जन्म दिया। दांडी मार्च भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" दांडी मार्च के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" दांडी मार्च के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" दांडी मार्च के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में दांडी मार्च (1930) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।