इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की और अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा। यही भारत शासन अधिनियम (1935) का वास्तविक महत्व है। भारत शासन अधिनियम के बारे में: यह उस समय तक ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे लंबा अधिनियम था, और स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के निर्माताओं ने बड़े बदलावों के साथ इसी को आधारभूत ढांचे के रूप में अपनाया। भारत शासन अधिनियम भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" भारत शासन अधिनियम के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की और अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" भारत शासन अधिनियम के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की और अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" भारत शासन अधिनियम के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की और अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भारत शासन अधिनियम (1935) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।