इसने युद्ध में अनैच्छिक भागीदारी के विरुद्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रतिपादित किया। यही व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) का वास्तविक महत्व है। व्यक्तिगत सत्याग्रह के बारे में: गांधी ने विनोबा भावे को पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही चुना और जवाहरलाल नेहरू को दूसरा, तथा इसे व्यापक जन आंदोलन के बजाय एक सीमित, प्रतीकात्मक विरोध के रूप में रखा गया। व्यक्तिगत सत्याग्रह भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने युद्ध में अनैच्छिक भागीदारी के विरुद्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रतिपादित किया। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने युद्ध में अनैच्छिक भागीदारी के विरुद्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रतिपादित किया। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने युद्ध में अनैच्छिक भागीदारी के विरुद्ध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रतिपादित किया। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।