इसने संविधान सभा और त्रि-स्तरीय संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। यही कैबिनेट मिशन (1946) का वास्तविक महत्व है। कैबिनेट मिशन के बारे में: इसके प्रस्ताव पर बनी संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, और इसी सभा ने आगे चलकर स्वतंत्र भारत का संविधान तैयार किया। कैबिनेट मिशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" कैबिनेट मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने संविधान सभा और त्रि-स्तरीय संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" कैबिनेट मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने संविधान सभा और त्रि-स्तरीय संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" कैबिनेट मिशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसने संविधान सभा और त्रि-स्तरीय संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कैबिनेट मिशन (1946) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।