वीन का विस्थापन नियम विकिरण की शिखर तरंगदैर्ध्य का संबंध किस राशि से स्थापित करता है?
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वीन का विस्थापन नियम यह समझने के लिए मौलिक है कि पिंड ऊष्मा और प्रकाश को कैसे विकिरित करते हैं। विकल्प A (दाब) गलत है — वीन के विस्थापन नियम का विकिरण करने वाले पिंड के दाब से कोई संबंध नहीं है। विकल्प B (परम तापमान) सही है — वीन का विस्थापन नियम बताता है कि किसी कृष्ण पिंड द्वारा अधिकतम विकिरण उत्सर्जित होने वाली तरंगदैर्ध्य (λm) उसके परम तापमान (T) के व्युत्क्रमानुपाती होती है। गणितीय रूप में: λm × T = b, जहाँ b = 2.898 × 10⁻³ m·K (वीन का विस्थापन स्थिरांक)। तापमान बढ़ने पर शिखर तरंगदैर्ध्य छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर खिसक जाती है (लाल/अवरक्त से नीली/बैंगनी की ओर)। इसीलिए उच्च तापमान वाले तारे नीले-सफेद दिखाई देते हैं। विकल्प C (द्रव्यमान) गलत है — पिंड का द्रव्यमान विकिरण की शिखर तरंगदैर्ध्य से सीधे संबंधित नहीं है। विकल्प D (रंग) गलत है — वीन का नियम परम तापमान और तरंगदैर्ध्य के गणितीय संबंध के बारे में है।
FAQ
Common questions and clear answers for this topic.
Heat is a form of energy that transfers between objects or systems due to a temperature difference, moving from a hotter body to a cooler one until thermal equilibrium is reached.