इसमें मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का समर्थन किया गया। यही कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) का वास्तविक महत्व है। कांग्रेस का कराची अधिवेशन के बारे में: यह मुख्यतः जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति प्रस्ताव के लिए याद किया जाता है, जिसने आगे चलकर भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार अध्याय को प्रभावित किया। कांग्रेस का कराची अधिवेशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। कथन "यह केवल एक स्थानीय आर्थिक उपाय था जिसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं था।" कांग्रेस का कराची अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का समर्थन किया गया। कथन "इसने सभी राष्ट्रवादी गतिविधियों को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया।" कांग्रेस का कराची अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का समर्थन किया गया। कथन "इसने बिना किसी वार्ता के तुरंत एक संप्रभु गणराज्य की स्थापना कर दी।" कांग्रेस का कराची अधिवेशन के लिए गलत है क्योंकि यह वास्तविक परिणाम को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जबकि सही परिणाम था: इसमें मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का समर्थन किया गया। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता।