सरदार वल्लभभाई पटेल कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) से सबसे अधिक जुड़े थे, क्योंकि इसमें मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का समर्थन किया गया। कांग्रेस का कराची अधिवेशन के बारे में: यह मुख्यतः जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति प्रस्ताव के लिए याद किया जाता है, जिसने आगे चलकर भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार अध्याय को प्रभावित किया। कांग्रेस का कराची अधिवेशन भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। सर स्टैफर्ड क्रिप्स गलत है क्योंकि सर स्टैफर्ड क्रिप्स क्रिप्स मिशन (1942) से जुड़े हैं, कांग्रेस का कराची अधिवेशन से नहीं। Pethick-Lawrence गलत है क्योंकि यह कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) के वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता। Stafford Cripps and A V Alexander गलत है क्योंकि यह कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) के वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कांग्रेस का कराची अधिवेशन (1931) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता। कांग्रेस का कराची अधिवेशन की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को इससे ठीक पहले और बाद की घटनाओं को भी 1927-1947 की समयरेखा में दोहराना चाहिए, क्योंकि प्रश्न बनाने वाले प्रायः निकटवर्ती वर्षों और जुड़े व्यक्तित्वों का उपयोग विकल्पों में करते हैं। याद रखें: कांग्रेस का कराची अधिवेशन — 1931 — सरदार वल्लभभाई पटेल।