भारत की प्राकृतिक वनस्पति में कौन-सा पद महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य “छोटी पत्तियां, कांटे और गहरी जड़ें जल संरक्षण में सहायक हैं” तथा “कांटेदार वृक्षों और झाड़ियों वाली मरुद्भिद वनस्पति” से सही रूप से संबंधित है?
व्याख्या
सही उत्तर: विकल्प D — उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन। उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन की सही पहचान छोटी पत्तियां, कांटे और गहरी जड़ें जल संरक्षण में सहायक हैं के रूप में होती है। उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन का संबंध कांटेदार वृक्षों और झाड़ियों वाली मरुद्भिद वनस्पति से भी है। उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन की एक अन्य पहचान बबूल, कीकर, खेजड़ी और कैक्टस जैसे रसीले पौधे विशिष्ट हैं है। उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन का एक और परीक्षा उपयोगी तथ्य छोटी पत्तियां, कांटे और गहरी जड़ें जल संरक्षण में सहायक हैं है। अन्य विकल्प गलत क्यों हैं: • विकल्प A — पर्वतीय वन: पर्वतीय वन ऊंचाई के साथ तापमान घटने से स्पष्ट वनस्पति क्षेत्रीकरण बनता है है। यहां यह गलत है क्योंकि पर्वतीय वन का वास्तविक संबंध पर्वतीय ढालों पर ऊंचाई के साथ बदलने वाली वनस्पति से है। • विकल्प B — मैंग्रोव वन: मैंग्रोव वन विशेष जड़ें पौधों को जलभराव और कम ऑक्सीजन वाली कीचड़ में जीवित रखती हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि मैंग्रोव वन का वास्तविक संबंध उष्णकटिबंधीय तटों और डेल्टाओं का लवण-सहिष्णु ज्वारीय वन से है। • विकल्प C — शोला वन: शोला वन नीलगिरि, अन्नामलाई और पलनी पहाड़ियों में महत्वपूर्ण शोला-घासभूमि परिदृश्य हैं है। यहां यह गलत है क्योंकि शोला वन का वास्तविक संबंध घाटियों के छोटे भागों में पाया जाने वाला उष्णकटिबंधीय पर्वतीय सदाबहार वन से है। परीक्षा सार: उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन को “छोटी पत्तियां, कांटे और गहरी जड़ें जल संरक्षण में सहायक हैं” और “कांटेदार वृक्षों और झाड़ियों वाली मरुद्भिद वनस्पति” से जोड़कर याद रखें।