ऋग्वेद को सामान्यतः सुरक्षित वैदिक संहिताओं में सबसे प्राचीन माना जाता है और इसलिए प्रारंभिक वैदिक भाषा, अनुष्ठान तथा समाज के पुनर्निर्माण में वह केंद्रीय है। “सबसे महत्त्वपूर्ण” व्यक्तिपरक श्रेणी है, क्योंकि प्रत्येक वेद की अलग अनुष्ठानिक और बौद्धिक भूमिका है। ऋग्वेद इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि ऋग्वेद और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।