सुकरात ने प्रश्न-पद्धति और नैतिक खोज के माध्यम से बाद के दर्शन को गहरा प्रभावित किया, जिसका प्रमुख चित्रण प्लेटो के संवादों में मिलता है। “पश्चिमी दर्शन का जनक” एक परंपरागत उपाधि है, कोई परीक्षण योग्य एकमात्र पद नहीं, क्योंकि पूर्व-सुकराती यूनानी चिंतकों ने भी आधारभूत योगदान दिए। सुकरात इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर हेरोडोटस, हिप्पोक्रेट्स और टॉलेमी वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि सुकरात और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।