ऋग्वेद चार वेदों में सबसे प्राचीन है और वैदिक संस्कृत में रचित सूक्तों का विशाल संग्रह सुरक्षित रखता है। यह सबसे पुराने सुरक्षित धार्मिक ग्रंथों में है, किंतु “विश्व का सबसे पुराना संग्रह” कहना अत्यधिक पूर्ण है क्योंकि अन्य प्राचीन पाठ-परंपराओं के साथ तिथि और तुलना में सावधानी चाहिए। स्रोत-परंपरा व्यक्ति, रचना और घटना को निश्चित ऐतिहासिक संदर्भ में रखती है। ऋग्वेद इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर अर्थशास्त्र, पुराण और नाट्यशास्त्र वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि ऋग्वेद और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।