सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों आईएनए मुकदमे (1945) से सबसे अधिक जुड़े थे, क्योंकि लाल किले में हुए मुकदमों ने व्यापक राष्ट्रवादी सहानुभूति पैदा की। आईएनए मुकदमे के बारे में: लाल किले में एक साथ मुकदमा झेलने वाले तीनों आईएनए अधिकारी तीन अलग-अलग धर्मों से थे, और इन मुकदमों से उपजी संयुक्त राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया को ब्रिटेन को सत्ता हस्तांतरण की ओर धकेलने वाला एक बड़ा कारण माना जाता है। आईएनए मुकदमे भारत के राष्ट्रीय आंदोलन (1927-1947) के कालखंड का हिस्सा है, और परीक्षा में इसे प्रायः इसी समयरेखा की पड़ोसी घटनाओं के साथ जोड़कर पूछा जाता है। सुभाष चंद्र बोस गलत है क्योंकि वे इस दौर की किसी अन्य घटना से जुड़े हैं, सीधे आईएनए मुकदमे से नहीं। Shah Nawaz Khan गलत है क्योंकि यह आईएनए मुकदमे (1945) के वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता। P K Sahgal and Gurbaksh Singh Dhillon गलत है क्योंकि यह आईएनए मुकदमे (1945) के वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता। SSC CGL, SSC CHSL, राज्य PSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में आईएनए मुकदमे (1945) से जुड़ा प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, इसलिए वर्ष, प्रमुख व्यक्ति और परिणाम को एक साथ याद रखने से राष्ट्रीय आंदोलन की समयरेखा की अन्य घटनाओं से भ्रम नहीं होता। आईएनए मुकदमे की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को इससे ठीक पहले और बाद की घटनाओं को भी 1927-1947 की समयरेखा में दोहराना चाहिए, क्योंकि प्रश्न बनाने वाले प्रायः निकटवर्ती वर्षों और जुड़े व्यक्तित्वों का उपयोग विकल्पों में करते हैं। याद रखें: आईएनए मुकदमे — 1945 — शाहनवाज़ खान, पी.