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भारतीय इतिहास
easyQ. No. 15810

लिखित साक्ष्यों की उपलब्धता के आधार पर आरंभिक मानव इतिहास को सामान्यतः किन तीन कालों में बाँटा जाता है?

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यह प्रश्न “लिखित साक्ष्यों की उपलब्धता के आधार पर आरंभिक मानव इतिहास को सामान्यतः किन तीन कालों में बाँटा जाता है?” में निहित ऐतिहासिक संबंध पर केंद्रित है। इसमें प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल को संबंधित कालक्रम, संस्था, संरक्षण, ग्रंथ, क्षेत्र या प्रशासनिक कार्य से जोड़ना आवश्यक है। सभी विकल्प समान वैचारिक श्रेणी के रखे गए हैं, इसलिए उत्तर केवल परिचित नाम देखकर नहीं चुना जा सकता। द्विभाषी सामग्री संक्षिप्त पृष्ठभूमि देती है, प्रमुख भ्रम स्पष्ट करती है और सीधे तथ्य, कथन-आधारित तथा विकल्प-उन्मूलन वाले अभ्यास में सहायता करती है।

Aप्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल
Bकेवल पुरापाषाण और नवपाषाण काल
Cकेवल प्राचीन और मध्यकाल
Dपाषाण, कांस्य, लौह और आधुनिक काल
Correct Answer: प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक कालYour Answer: A

Explanation

सही उत्तर: प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल। लिखित साक्ष्यों के आधार पर अतीत को सामान्यतः प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल में बाँटा जाता है। प्रागैतिहासिक काल में लिखित स्रोत नहीं, आद्य-इतिहास में लिपि अपठित या परोक्ष होती है और ऐतिहासिक काल में पठनीय लिखित स्रोत उपलब्ध होते हैं। प्रश्न में उल्लिखित संस्था या प्रथा ही निर्णायक संकेत देती है। प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर केवल पुरापाषाण और नवपाषाण काल, केवल प्राचीन और मध्यकाल और पाषाण, कांस्य, लौह और आधुनिक काल वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। व्यक्ति, काल, स्थान और संस्थागत उद्देश्य को एक साथ देखने पर यह भ्रम दूर होता है। दिया गया स्रोत प्रचलित संक्षिप्त कथन और अधिक सटीक ऐतिहासिक व्याख्या के बीच अंतर भी स्पष्ट करता है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।

महत्वपूर्ण नोट्स

  • प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल का संबंध प्रश्न में दिए विशिष्ट कर्ता, कालक्रम या कार्य से है।
  • मुख्य तथ्यात्मक संदर्भ है: सही उत्तर: प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल।
  • इसे केवल पुरापाषाण और नवपाषाण काल से न मिलाएँ, जिसका ऐतिहासिक संबंध अलग है।
  • केवल प्राचीन और मध्यकाल और पाषाण, कांस्य, लौह और आधुनिक काल को काल तथा संस्थागत भूमिका के आधार पर जाँचें।
  • कथन-आधारित प्रश्न में केवल नाम पहचानने के बजाय प्रत्येक कथन सत्यापित करें।

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