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भारतीय इतिहास
mediumQ. No. 15894

ऋग्वैदिक सामग्री में सामाजिक विभेदन का सबसे सही वर्णन कौन-सा है?

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यह प्रश्न “ऋग्वैदिक सामग्री में सामाजिक विभेदन का सबसे सही वर्णन कौन-सा है?” में निहित ऐतिहासिक संबंध पर केंद्रित है। इसमें स्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थी को संबंधित कालक्रम, संस्था, संरक्षण, ग्रंथ, क्षेत्र या प्रशासनिक कार्य से जोड़ना आवश्यक है। सभी विकल्प समान वैचारिक श्रेणी के रखे गए हैं, इसलिए उत्तर केवल परिचित नाम देखकर नहीं चुना जा सकता। द्विभाषी सामग्री संक्षिप्त पृष्ठभूमि देती है, प्रमुख भ्रम स्पष्ट करती है और सीधे तथ्य, कथन-आधारित तथा विकल्प-उन्मूलन वाले अभ्यास में सहायता करती है।

Aहर समूह पर पूर्णतः निश्चित जाति-व्यवस्था लागू थी
Bकोई सामाजिक अंतर नहीं था
Cकेवल राजाओं के व्यवसाय थे
Dस्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थी
Correct Answer: स्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थीYour Answer: D

Explanation

ऋग्वैदिक सूक्त स्थिति, वंश, अनुष्ठानिक भूमिका और व्यवसाय के अंतर दिखाते हैं। पुरुष सूक्त चार वर्णों का उल्लेख करता है, पर इतिहासकार उसकी काल-स्थिति पर बहस करते हैं और बाद की वंशानुगत जाति-व्यवस्था को पूरे ऋग्वैदिक काल पर अपरिवर्तित रूप में आरोपित करने से सावधान करते हैं। स्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थी इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर हर समूह पर पूर्णतः निश्चित जाति-व्यवस्था लागू थी, कोई सामाजिक अंतर नहीं था और केवल राजाओं के व्यवसाय थे वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। दिया गया स्रोत प्रचलित संक्षिप्त कथन और अधिक सटीक ऐतिहासिक व्याख्या के बीच अंतर भी स्पष्ट करता है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि स्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थी और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।

महत्वपूर्ण नोट्स

  • स्थिति और व्यवसाय महत्त्वपूर्ण थे, जबकि बाद की वंशानुगत वर्ण-कठोरता पूरी तरह विकसित नहीं थी का संबंध प्रश्न में दिए विशिष्ट कर्ता, कालक्रम या कार्य से है।
  • मुख्य तथ्यात्मक संदर्भ है: ऋग्वैदिक सूक्त स्थिति, वंश, अनुष्ठानिक भूमिका और व्यवसाय के अंतर दिखाते हैं।
  • इसे हर समूह पर पूर्णतः निश्चित जाति-व्यवस्था लागू थी से न मिलाएँ, जिसका ऐतिहासिक संबंध अलग है।
  • कोई सामाजिक अंतर नहीं था और केवल राजाओं के व्यवसाय थे को काल तथा संस्थागत भूमिका के आधार पर जाँचें।
  • कथन-आधारित प्रश्न में केवल नाम पहचानने के बजाय प्रत्येक कथन सत्यापित करें।

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