वैदिक शब्दावली में खोदे कुओं, जल-मार्गों या कृत्रिम रूप से प्राप्त जल के रूप में व्याख्यायित उल्लेख मिलते हैं, किंतु “नहर का सबसे पहला उल्लेख” किसी एक वेद को देना अनुवाद और परिभाषा पर निर्भर है। संशोधित प्रश्न आधुनिक नहर-तंत्र की कल्पना किए बिना प्रमाण जाँचता है। खोदे गए या कृत्रिम रूप से प्राप्त जल के उल्लेख इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर तिथि सहित पत्थर का नहर-मानचित्र, कंक्रीट बाँध बनाने का ग्रंथ और नहर मंत्रालय का अभिलेख वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि खोदे गए या कृत्रिम रूप से प्राप्त जल के उल्लेख और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।