सही उत्तर: बृहदारण्यक उपनिषद्। प्रश्न में पूछा गया तथ्य वैदिक साहित्य और इतिहास के मानक अध्ययन से जुड़ा है। अन्य विकल्प संबंधित विषयों या ग्रंथों से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन वे इस प्रश्न में पूछे गए विशिष्ट स्रोत, संख्या, देवता, मंडल या अवधारणा का सही उत्तर नहीं हैं। बृहदारण्यक उपनिषद् इसलिए उपयुक्त है क्योंकि प्रश्न में दिया कालक्रम, कर्ता और कार्य इसी से मेल खाते हैं। विकल्पों की तुलना करने पर कठोपनिषद्, छान्दोग्य उपनिषद् और ईशोपनिषद् वास्तविक ऐतिहासिक नाम या पद अवश्य हैं, किंतु उनका संबंध अलग शासक, संस्था, ग्रंथ, क्षेत्र या समय से है। सामान्य भूल यह होती है कि विद्यार्थी प्रश्न में पूछी गई भूमिका जाँचे बिना सबसे परिचित नाम चुन लेता है। कथन-आधारित रूप में प्रत्येक कथन को अलग जाँचना चाहिए, क्योंकि सही नाम गलत तिथि या गलत कार्य की भरपाई नहीं कर सकता। कालक्रम वाले रूप में पहले घटना को संबंधित वंश के भीतर रखें और उसके बाद विकल्प हटाएँ। अतः याद रखने योग्य संबंध केवल विकल्प का अक्षर नहीं, बल्कि बृहदारण्यक उपनिषद् और ऊपर दिया तथ्यात्मक संदर्भ है।